यूपी उदय मिशन

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Anuradha Chaudhary


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India VS China

Posted On: 10 Sep, 2017  
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क्या भारत चीन से युद्ध के लिए तैयार है

Posted On: 28 Aug, 2017  
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आप और भाजपा

Posted On: 7 Jan, 2014  
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देवालय से पहले शौचालय

Posted On: 10 Dec, 2013  
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मनमोहन सिंह अन्‍डर एचीबर या कुछ और

Posted On: 9 Jul, 2012  
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पूर्वागह से गस्‍त बुद्धिजीवी

Posted On: 4 Jul, 2012  
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अनुराधा चौधरी का एक पत्र सोहनपाल सिंह जी के नाम

Posted On: 29 Jun, 2012  
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आओ प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री खेले

Posted On: 22 Jun, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

आदरणीय अनुराधा जी यूँ तो अपने किसी लेख के लिए मैं किसी को जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हूँ परन्तु जब आपने मेरा नाम लिख का मुझे खुला पात्र ही लिख दिया है तो उसका जवाब देना भी जरूरी ही हो गया है, पहली बात तो यह है की मैंने जिस बात को कहा ही नहीं है उसे आप बल पूर्वक मेरे मुहं में ठूसना चाहती है जो की गलत है, दूसरा यह की मैं अपने लेख के पहले वाक्य में ही लिखा है की यह जागरण मंच के द्वारा बहस आरम्भ की गई है आपको कोई आपत्ति है तो मंच से कहें - क्या आप को इस कारण से दुःख है की जागरण अखबार ने लेख के कुछ अंश प्रकाशित कर दिया है - वैसे भी सच्चाई से आँखे बंद करने वाले को तो कोई कुछ समझा ही नहीं सकता - आदरणीया अनुराधा चैधरी जी, मुझे यह समझ में नहीं आया की आपका आक्रोश मुझ पर है यह मेरे लेख पर है या जागरण मंच पर है अगर आपकी नजर में अखबार वाले गलत है मेरे लेख के कुछ अंश छाप कर तो आप अख्बार वालो से शिकायत करे मुझ से क्यों ? दूसरी बात आपने मेरा लेख पुरे ध्यान से पढ़ा ही नहीं है मैंने लेख में कहनी भी गोधरा काण्ड या गोधरा का नाम नहीं लिया है लेकिन फिर भी उन शब्दों को मेरे मुंह में ठुसने की कोशिस की है ? मेरठ के विषय में आपको एक बात बताना चाहूँगा की मेरा जन्म ही मेरठ की क्रन्तिकारी भूमि पर ही हुआ है और यही भूमि मेरी कर्म भूमि भी है जहाँ मैंने ४० वर्ष सरकारी सेवा की अब ७ वर्ष पूर्व अवकाश ग्रहण कर चूका हूँ. मेरठ के दंगे आपने अख़बारों में पढ़े और देखे होंगे मैंने प्रत्यक्ष देखें है – और हाँ विद्वान जन अपने को ज्ञानी और दुसरे को मुर्ख नहीं समझते है —- वैसे तो आपके कमेंट्स का जवाब में अपने ब्लॉग पर ही दे चूका हूँ परन्तु आपने ब्लॉग के रूप में व्यक्तित्व पर ही आक्रमण किया है तो इसका जवाब भी देना ही पड़ेगा - दूसरी बात आपने ८४ के सिक्खों के संहार की बात की है तो मेराआपसे अनुरोध है की ऐसे विषय को अगर न उठाया जय तो उचित ही होगा क्योंकि उस समय के पंजाब के उग्रवाद के कारण ही पवित्र स्थल पर जो फ़ौज की कार्यवाही हुयी थी उसी की परिणिति में इंदिरागांधी के सुरक्षा कर्मियों ने ही उनकी ह्त्या कर दी थी जिस कारण पुरे देश में सिक्खों का कत्ले आम हुआ था और उस समय के फौजी जनरल वैध की भी ह्त्या की गई थी वह उग्रवाद एक त्रासदी थी उसको वही जान सकता है जिसने उसे झेला था और आज भी झेल रहे है ? क्योंकि निर्दोष लोगों की हत्या और सांप्रदायिक दंगे किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक होते है इस लिए उसकी भर्त्सना की जाती है उसे किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता और न ही मैंने किसी दंगे को उचित नहीं ठहराया है इस लिए आपके सारे आरोप निराधार है . > किसी ब्लॉग पोस्ट पर टिप्पणी उसी पोस्ट पर की जाय तो उचित है और वही आपने किया भी लेकिन आपने पता नहीं किस विच्छोब या दुर्भावना या जलन के कारण मेरे विरुद्ध एक अभियान का आरम्भ ही कर दिया है आपसे पहले यह कार्य कई सज्जन पुरुष कर चुके है लेकिन आज एक स्त्री को मैदान में उतार दिया है हो सकता है उन्ही में किसी ने छद्दम नाम से ऐसा लेख लिख कर मेरे विरुद्ध एक युद्ध जैसा छेड़ दिया है, चूँकि आप एक स्त्री है और किसी स्त्री का ऐसा आचरण हो ही नहीं सकता इस लिए आपसे अनुरोध है की भविष्य में इस प्रकार निंदक कुप्रचार और व्यक्तिगत द्वेष या दुर्भावना से मेरे विरुद्ध कोई प्रयास न करे अन्यथा व्यक्तिगत स्तर पर लिखना मुझे भी आता है और एक सम्मानित स्त्री होने के नाते आपको अधिक तकलीफ और छोभ होगा, इस लिए आशा है आपको कुछ अनुभूति अवश्य ही होगी, धन्यवाद.

के द्वारा: s.p. singh s.p. singh

अनुराधा जी, आपके लेख छद्मधर्मनिरपेक्षता के झंडाबरदारों व कांग्रेस के चापलूसों के लिए एक आइना है!! हद तो तब हो जाती है जब २७ फरबरी २०१२ को गोधरा में साबरमती ट्रेन में कारसेवकों को जिन्दा जलाये जाने के १० साल होते हैं और तथाकथित सेकुलर उसे गुजरात दंगों की दसवीं बरसी बताकर छाती कूटते हैं और मुसलामानों के गम में आंसू की नदियाँ बहा डालते हैं!! उस दिन भी नरेद्र मोदी को जमकर कोसा जाता है लेकिन गोधरा में ट्रेन जलन एवाले शैतानों की निंदा में एक शब्द भी किसी की जबान से नहीं निकलता!! आपका लेख सराहनीय है, यदि आप किसी का व्यक्तिगत नाम न लेती तो और भी अच्छा रहता क्योंकि तथ्यों से परे लिखने वाले कई लोग हर जगह होते हैं और यहाँ भी होना स्वाभाविक है!!

के द्वारा: vasudev tripathi vasudev tripathi

आदरणीया अनुराधा चैधरी जी, मुझे यह समझ में नहीं आया की आपका आक्रोश मुझ पर है यह मेरे लेख पर है या जागरण मंच पर है अगर आपकी नजर में अखबार वाले गलत है मेरे लेख के कुछ अंश छाप कर तो आप अख्बार वालो से शिकायत करे मुझ से क्यों ? दूसरी बात आपने मेरा लेख पुरे ध्यान से पढ़ा ही नहीं है मैंने लेख में कहनी भी गोधरा काण्ड या गोधरा का नाम नहीं लिया है लेकिन फिर भी उन शब्दों को मेरे मुंह में ठुसने की कोशिस की है ? मेरठ के विषय में आपको एक बात बताना चाहूँगा की मेरा जन्म ही मेरठ की क्रन्तिकारी भूमि पर ही हुआ है और यही भूमि मेरी कर्म भूमि भी है जहाँ मैंने ४० वर्ष सरकारी सेवा की अब ७ वर्ष पूर्व अवकाश ग्रहण कर चूका हूँ. मेरठ के दंगे आपने अख़बारों में पढ़े और देखे होंगे मैंने प्रत्यक्ष देखें है – और हाँ विद्वान जन अपने को ज्ञानी और दुसरे को मुर्ख नहीं समझते है —- वैसे तो आपके कमेंट्स का जवाब में अपने ब्लॉग पर ही दे चूका हूँ परन्तु आपने ब्लॉग के रूप में व्यक्तित्व पर ही आक्रमण किया है तो इसका जवाब भी देना ही पड़ेगा - दूसरी बात आपने ८४ के सिक्खों के संहार की बात की है तो मेराआपसे अनुरोध है की ऐसे विषय को अगर न उठाया जय तो उचित ही होगा क्योंकि उस समय के पंजाब के उग्रवाद के कारण ही पवित्र स्थल पर जो फ़ौज की कार्यवाही हुयी थी उसी की परिणिति में इंदिरागांधी के सुरक्षा कर्मियों ने ही उनकी ह्त्या कर दी थी जिस कारण पुरे देश में सिक्खों का कत्ले आम हुआ था और उस समय के फौजी जनरल वैध की भी ह्त्या की गई थी वह उग्रवाद एक त्रासदी थी उसको वही जान सकता है जिसने उसे झेला था और आज भी झेल रहे है ? क्योंकि निर्दोष लोगों की हत्या और सांप्रदायिक दंगे किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक होते है इस लिए उसकी भर्त्सना की जाती है उसे किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता और न ही मैंने किसी दंगे को उचित नहीं ठहराया है इस लिए आपके सारे आरोप निराधार है . > किसी ब्लॉग पोस्ट पर टिप्पणी उसी पोस्ट पर की जाय तो उचित है और वही आपने किया भी लेकिन आपने पता नहीं किस विच्छोब या दुर्भावना या जलन के कारण मेरे विरुद्ध एक अभियान का आरम्भ ही कर दिया है आपसे पहले यह कार्य कई सज्जन पुरुष कर चुके है लेकिन आज एक स्त्री को मैदान में उतार दिया है हो सकता है उन्ही में किसी ने छद्दम नाम से ऐसा लेख लिख कर मेरे विरुद्ध एक युद्ध जैसा छेड़ दिया है, चूँकि आप एक स्त्री है और किसी स्त्री का ऐसा आचरण हो ही नहीं सकता इस लिए आपसे अनुरोध है की भविष्य में इस प्रकार निंदक कुप्रचार और व्यक्तिगत द्वेष या दुर्भावना से मेरे विरुद्ध कोई प्रयास न करे अन्यथा व्यक्ति गत स्तर पर लिखना मुझे भी आता है और एक सम्मानित स्त्री होने के नाते आपको अधिक तकलीफ और छोभ होगा, इस लिए आशा है आपको कुछ अनुभूति अवश्य ही होगी, धन्यवाद.

के द्वारा: s.p. singh s.p. singh

आदरणीया अनुराधा चौधरी जी वैसे तो आपके कमेंट्स का जवाब अपने ब्लॉग पर ही दे दिया है लेकिन आपको उससे शायद संतुष्ठी नहीं हुई जो आप व्यक्तिगत स्तर उतर आईं है आपकी भाषा और आरोप दोनो से ही साम्प्रदायिकता की बू आ रही है क्योंकि विगत में हुए जितने भी दंगे है वह अपनी परिणिति को पहुँच गए है क्या आप १९८४ के दंगो के विषय वस्तु को ताजा करना चाहती है -- क्योंकि शायद आपको याद भी नहीं होगा की उस समय की आर्मी की कार्यवाही का परिणाम था की इंदिरा गाँधी की हत्या उसी के सुरक्षाकर्मियों के द्वारा की गई थी और उस समय के कार्यवाही के कमांडर रहे जनरल वैदध को भी सिक्ख उग्रवादियों ने मार दिया था इस लिए ऐसे संवेदन शील विषय को न भी याद किया जाय तो अच्छा है - आपसे अनुरोध है की आप ब्लाग पर लिखे गए विषय को व्यक्तिगत स्तर पर युद्ध के समान प्रतिष्ठा का प्रशन न बनाए तो आपकी सेहत के लिए अच्छा होगा अन्यथा व्यक्तिगत स्तर पर लिखना मैं भी जानता हूँ फिर आपको एक स्त्री होने के नाते अधिक तकलीफ होगी, धन्यवाद.

के द्वारा: s.p. singh s.p. singh

अनुराधा जी सादर, सिर्फ एस पी सिंह साहब ही नहीं अन्य भी कई ब्लोगर्स द्वारा गोधरा काण्ड के लिए मोदी को दोषी बताया है. शायद लोगों को गोधरा नाम याद रहा किन्तु हकीकत का पता नहीं है. मोदी को लेकर जिस तरह राजनितिक गलियारे में बैचेनी दिखाई दे रही है ऐसी अन्य किसी नाम को लेकर पूर्व में नहीं देखी गयी, इसी से लगता है की कांग्रेस और कई धार्मिक नेताओं को अपनी लुटिया डूबती नजर आने लगी है और उसे ही बचाने के लिए मनचाहे वार किये जा रहे हैं. आज देश को सच में जरूरत है मोदी जैसे नेता की, ऐसे वक्त मोदी का विरोध सिर्फ हताशा ही कहा जा सकता है. आपकी अंतिम पंक्तियों के लिए तो मै सरकार को धन्यवाद ही दूंगा."सिंह साहब क्‍या आप जानते है कि काफी लम्‍बे समय से देश मे कोई साम्‍प्रदायिक दंगा क्‍यो न ही हुआ। इसके लिये कोई राजनेता जिम्‍मेदार नही है बल्कि समाज की बदलती सोच जिम्‍मेदार है। दोनो वर्गो के लोग अब अपनी रोजी रोटी की बात करते है उन्‍हे अपनी जिविका कमाने से ही छुटटी नही है दंगे फसाद के बारे मे कौन सोचे।"

के द्वारा: akraktale akraktale

अनुराधा जी, नमस्कार। यह सच  है आज  भ्रष्टाचार समाज  में ब्लड  कैंसर की तरह समाया हुआ   है। इसके लिये बहुत  बड़े आप्रेशन  की आवश्यकता है। चूँकि समाज  का एक  होने के कारण  समाज  के पतन  का दोषी मैं भी हूँ। किन्तु  चंद  लोगों का राजा एवं लालू को सम्मान  देने को पूरे समाज का सम्मान  कैसे मान  लिया जाय। उनकी करारी हार  साबित  करती है कि समाज  भ्रष्टाचारियों एवं राजनैतिक  अपराधियों को स्वीकार नहीं करना चाहती। संतोष जी की तरह मेरा भी मानना है कि इन  समस्याओॆ के मूल  में समाज  का धर्म , जाति एवं आर्थिक  आधार  पर बँटा होना है। इसी का लाभ  उठाकर ऐसे लोग  संसद  एवं विधानसभाओं में पहुँचकर उन्हें कलंकित  करते हैं। लोकपाल  बने न बने, भ्रष्टाचार  मिटे न  मिटे, लेकिन  एक  बात  तो आवश्य  हुई है कि अन्ना ने हमें जगा दिया है।  जब तक  जातिगत  भेदभाव नहीं मिटेंगे यह भ्रष्टाचारी तथा अपराधी ऐसे ही जीतते रहेंगे। अब  हमें यह सब बदलना है और यह स्वयं के  बदलने से होगा। पहले हमें बदलना होगा तभी समाज  बदलेगा। यदि हम  यह सोचेंगे कि पहिले समाज  बदले फिर हम, तो समस्या का कभी भी समाधान  नहीं होगा।.....साभार.....

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

अनुराधा चौधरी जी नमस्कार /आपने अन्ना टीम व रामदेव की राजनैतिक महत्वकांसा का जिक्र किया तो उसमें क्या बुरा हें / जब आप राजनीती में आ सकती हें तो कोई ओर क्यों नहीं / यदि आज ये लोग सरकार पर इल्जाम लगा रहें हें तो सरकार को उसका जवाब देना चाहिए / ये कोई महाजन का बहीखाता नहीं कि जो लिख दिया वो सही / ये लोकतंत्र हें ओर इसमें सभी को राजनेतिक इच्छा रखनी चाहिए चाहे वो कोई भी छोटे से छोटा क्यों न हो / ये लोग सफल हो या न हों पर अपने उद्देश्य में सफल जरुर हें / कोल के आबंटन में जो आंकड़े इन्होने दिए हें वो सरकार की बद नियति की ओर इशारा करते हें / जो अप्राश करता हें वो तो अपराधी ह़े ही पर साथ देने वाला या जिसकी नाक के नीचे अपराध हुआ वो भी अपराधी कहलाता हें / उसकी मंशा की जांच करनी होती हें / मुझे लगता हें इन लोगों के पास राजनेता की तरह पेसे देकर जुटाई भीड़ नहीं हें वो आम आदमी हें जो महगाई . बेरोजगारी व अपराध से दुखी हें / ओर वो इनका साथ खडा होकर अपनी गुस्सा जाहिर करता हें / में ये मानता हूँ कि भीड़ उनकी राजनेतिक सपोर्टर नहीं हो सकती / इनके इस आन्दोलन से देश का नुक्सान नहीं फायदा होगा / लोग जागरूक होंगे / "राजनैतिक महात्‍वाकांक्षा पाले इन लोगों से भ्रष्‍टाचार के विरूद्ध कोई बडी सफलता मिलेगी इसकी उम्‍मीद करना बेकार है।" ये कहना गलत हें तो क्या जनता यूँ ही हाथ पर हाथ धरे बेठी रही / आपकी बातों से किसी भी दशा में सहमत नहीं हुआ जा सकता भीड़ कभी कभी वोट में नहीं बदलती / यदि आप की चुनावी सीट हरैया में कोई हीरोइन चुनाव लड़ / भीड़ जरुर आयेगी पर वोट अपनी मर्जी से देगी आपके काम को देख कर हवा का रुख भांप कर / अनुराधा चौधरी जी नमस्कार /आपने अन्ना टीम व रामदेव की राजनैतिक महत्वकांसा का जिक्र किया तो उसमें क्या बुरा हें / जब आप राजनीती में आ सकती हें तो कोई ओर क्यों नहीं / यदि आज ये लोग सरकार पर इल्जाम लगा रहें हें तो सरकार को उसका जवाब देना चाहिए / ये कोई महाजन का बहीखाता नहीं कि जो लिख दिया वो सही / ये लोकतंत्र हें ओर इसमें सभी को राजनेतिक इच्छा रखनी चाहिए चाहे वो कोई भी छोटे से छोटा क्यों न हो / ये लोग सफल हो या न हों पर अपने उद्देश्य में सफल जरुर हें / कोल के आबंटन में जो आंकड़े इन्होने दिए हें वो सरकार की बद नियति की ओर इशारा करते हें / जो अप्राश करता हें वो तो अपराधी ह़े ही पर साथ देने वाला या जिसकी नाक के नीचे अपराध हुआ वो भी अपराधी कहलाता हें / उसकी मंशा की जांच करनी होती हें / मुझे लगता हें इन लोगों के पास राजनेता की तरह पेसे देकर जुटाई भीड़ नहीं हें वो आम आदमी हें जो महगाई . बेरोजगारी व अपराध से दुखी हें / ओर वो इनका साथ खडा होकर अपनी गुस्सा जाहिर करता हें / में ये मानता हूँ कि भीड़ उनकी राजनेतिक सपोर्टर नहीं हो सकती / इनके इस आन्दोलन से देश का नुक्सान नहीं फायदा होगा / लोग जागरूक होंगे / "राजनैतिक महात्‍वाकांक्षा पाले इन लोगों से भ्रष्‍टाचार के विरूद्ध कोई बडी सफलता मिलेगी इसकी उम्‍मीद करना बेकार है।" ये कहना गलत हें तो क्या जनता यूँ ही हाथ पर हाथ धरे बेठी रही / आपकी बातों से किसी भी दशा में सहमत नहीं हुआ जा सकता भीड़ कभी कभी वोट में नहीं बदलती / यदि आप की चुनावी सीट हरैया में कोई हीरोइन चुनाव लड़ / भीड़ जरुर आयेगी पर वोट अपनी मर्जी से देगी आपके काम को देख कर हवा का रुख भांप कर / अनुराधा चौधरी जी नमस्कार /आपने अन्ना टीम व रामदेव की राजनैतिक महत्वकांसा का जिक्र किया तो उसमें क्या बुरा हें / जब आप राजनीती में आ सकती हें तो कोई ओर क्यों नहीं / यदि आज ये लोग सरकार पर इल्जाम लगा रहें हें तो सरकार को उसका जवाब देना चाहिए / ये कोई महाजन का बहीखाता नहीं कि जो लिख दिया वो सही / ये लोकतंत्र हें ओर इसमें सभी को राजनेतिक इच्छा रखनी चाहिए चाहे वो कोई भी छोटे से छोटा क्यों न हो / ये लोग सफल हो या न हों पर अपने उद्देश्य में सफल जरुर हें / कोल के आबंटन में जो आंकड़े इन्होने दिए हें वो सरकार की बद नियति की ओर इशारा करते हें / जो अप्राश करता हें वो तो अपराधी ह़े ही पर साथ देने वाला या जिसकी नाक के नीचे अपराध हुआ वो भी अपराधी कहलाता हें / उसकी मंशा की जांच करनी होती हें / मुझे लगता हें इन लोगों के पास राजनेता की तरह पेसे देकर जुटाई भीड़ नहीं हें वो आम आदमी हें जो महगाई . बेरोजगारी व अपराध से दुखी हें / ओर वो इनका साथ खडा होकर अपनी गुस्सा जाहिर करता हें / में ये मानता हूँ कि भीड़ उनकी राजनेतिक सपोर्टर नहीं हो सकती / इनके इस आन्दोलन से देश का नुक्सान नहीं फायदा होगा / लोग जागरूक होंगे / "राजनैतिक महात्‍वाकांक्षा पाले इन लोगों से भ्रष्‍टाचार के विरूद्ध कोई बडी सफलता मिलेगी इसकी उम्‍मीद करना बेकार है।" ये कहना गलत हें तो क्या जनता यूँ ही हाथ पर हाथ धरे बेठी रही / 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हें वो आम आदमी हें जो महगाई . बेरोजगारी व अपराध से दुखी हें / ओर वो इनका साथ खडा होकर अपनी गुस्सा जाहिर करता हें / में ये मानता हूँ कि भीड़ उनकी राजनेतिक सपोर्टर नहीं हो सकती / इनके इस आन्दोलन से देश का नुक्सान नहीं फायदा होगा / लोग जागरूक होंगे / "राजनैतिक महात्‍वाकांक्षा पाले इन लोगों से भ्रष्‍टाचार के विरूद्ध कोई बडी सफलता मिलेगी इसकी उम्‍मीद करना बेकार है।" ये कहना गलत हें तो क्या जनता यूँ ही हाथ पर हाथ धरे बेठी रही / आपकी बातों से किसी भी दशा में सहमत नहीं हुआ जा सकता भीड़ कभी कभी वोट में नहीं बदलती / यदि आप की चुनावी सीट हरैया में कोई हीरोइन चुनाव लड़ / भीड़ जरुर आयेगी पर वोट अपनी मर्जी से देगी आपके काम को देख कर हवा का रुख भांप कर / Rate this Article: अनुराधा चौधरी जी नमस्कार /आपने अन्ना टीम व रामदेव की राजनैतिक महत्वकांसा का जिक्र किया तो उसमें क्या बुरा हें / जब आप राजनीती में आ सकती हें तो कोई ओर क्यों नहीं / यदि आज ये लोग सरकार पर इल्जाम लगा रहें हें तो सरकार को उसका जवाब देना चाहिए / ये कोई महाजन का बहीखाता नहीं कि जो लिख दिया वो सही / ये लोकतंत्र हें ओर इसमें सभी को राजनेतिक इच्छा रखनी चाहिए चाहे वो कोई भी छोटे से छोटा क्यों न हो / ये लोग सफल हो या न हों पर अपने उद्देश्य में सफल जरुर हें / कोल के आबंटन में जो आंकड़े इन्होने दिए हें वो सरकार की बद नियति की ओर इशारा करते हें / जो अप्राश करता हें वो तो अपराधी ह़े ही पर साथ देने वाला या जिसकी नाक के नीचे अपराध हुआ वो भी अपराधी कहलाता हें / उसकी मंशा की जांच करनी होती हें / मुझे लगता हें इन लोगों के पास राजनेता की तरह पेसे देकर जुटाई भीड़ नहीं हें वो आम आदमी हें जो महगाई . बेरोजगारी व अपराध से दुखी हें / ओर वो इनका साथ खडा होकर अपनी गुस्सा जाहिर करता हें / में ये मानता हूँ कि भीड़ उनकी राजनेतिक सपोर्टर नहीं हो सकती / इनके इस आन्दोलन से देश का नुक्सान नहीं फायदा होगा / लोग जागरूक होंगे / "राजनैतिक महात्‍वाकांक्षा पाले इन लोगों से भ्रष्‍टाचार के विरूद्ध कोई बडी सफलता मिलेगी इसकी उम्‍मीद करना बेकार है।" ये कहना गलत हें तो क्या जनता यूँ ही हाथ पर हाथ धरे बेठी रही / आपकी बातों से किसी भी दशा में सहमत नहीं हुआ जा सकता भीड़ कभी कभी वोट में नहीं बदलती / यदि आप की चुनावी सीट हरैया में कोई हीरोइन चुनाव लड़ / भीड़ जरुर आयेगी पर वोट अपनी मर्जी से देगी आपके काम को देख कर हवा का रुख भांप कर / Rate this Article: अनुराधा चौधरी जी नमस्कार /आपने अन्ना टीम व रामदेव की राजनैतिक महत्वकांसा का जिक्र किया तो उसमें क्या बुरा हें / जब आप राजनीती में आ सकती हें तो कोई ओर क्यों नहीं / यदि आज ये लोग सरकार पर इल्जाम लगा रहें हें तो सरकार को उसका जवाब देना चाहिए / ये कोई महाजन का बहीखाता नहीं कि जो लिख दिया वो सही / ये लोकतंत्र हें ओर इसमें सभी को राजनेतिक इच्छा रखनी चाहिए चाहे वो कोई भी छोटे से छोटा क्यों न हो / ये लोग सफल हो या न हों पर अपने उद्देश्य में सफल जरुर हें / कोल के आबंटन में जो आंकड़े इन्होने दिए हें वो सरकार की बद नियति की ओर इशारा करते हें / जो अप्राश करता हें वो तो अपराधी ह़े ही पर साथ देने वाला या जिसकी नाक के नीचे अपराध हुआ वो भी अपराधी कहलाता हें / उसकी मंशा की जांच करनी होती हें / मुझे लगता हें इन लोगों के पास राजनेता की तरह पेसे देकर जुटाई भीड़ नहीं हें वो आम आदमी हें जो महगाई . बेरोजगारी व अपराध से दुखी हें / ओर वो इनका साथ खडा होकर अपनी गुस्सा जाहिर करता हें / में ये मानता हूँ कि भीड़ उनकी राजनेतिक सपोर्टर नहीं हो सकती / इनके इस आन्दोलन से देश का नुक्सान नहीं फायदा होगा / लोग जागरूक होंगे / "राजनैतिक महात्‍वाकांक्षा पाले इन लोगों से भ्रष्‍टाचार के विरूद्ध कोई बडी सफलता मिलेगी इसकी उम्‍मीद करना बेकार है।" ये कहना गलत हें तो क्या जनता यूँ ही हाथ पर हाथ धरे बेठी रही / आपकी बातों से किसी भी दशा में सहमत नहीं हुआ जा सकता भीड़ कभी कभी वोट में नहीं बदलती / यदि आप की चुनावी सीट हरैया में कोई हीरोइन चुनाव लड़ / भीड़ जरुर आयेगी पर वोट अपनी मर्जी से देगी आपके काम को देख कर हवा का रुख भांप कर / अनुराधा चौधरी जी नमस्कार /आपने अन्ना टीम व रामदेव की राजनैतिक महत्वकांसा का जिक्र किया तो उसमें क्या बुरा हें / जब आप राजनीती में आ सकती हें तो कोई ओर क्यों नहीं / यदि आज ये लोग सरकार पर इल्जाम लगा रहें हें तो सरकार को उसका जवाब देना चाहिए / ये कोई महाजन का बहीखाता नहीं कि जो लिख दिया वो सही / ये लोकतंत्र हें ओर इसमें सभी को राजनेतिक इच्छा रखनी चाहिए चाहे वो कोई भी छोटे से छोटा क्यों न हो / ये लोग सफल हो या न हों पर अपने उद्देश्य में सफल जरुर हें / कोल के आबंटन में जो आंकड़े इन्होने दिए हें वो सरकार की बद नियति की ओर इशारा करते हें / जो अप्राश करता हें वो तो अपराधी ह़े ही पर साथ देने वाला या जिसकी नाक के नीचे अपराध हुआ वो भी अपराधी कहलाता हें / उसकी मंशा की जांच करनी होती हें / मुझे लगता हें इन लोगों के पास राजनेता की तरह पेसे देकर जुटाई भीड़ नहीं हें वो आम आदमी हें जो महगाई . बेरोजगारी व अपराध से दुखी हें / ओर वो इनका साथ खडा होकर अपनी गुस्सा जाहिर करता हें / में ये मानता हूँ कि भीड़ उनकी राजनेतिक सपोर्टर नहीं हो सकती / इनके इस आन्दोलन से देश का नुक्सान नहीं फायदा होगा / लोग जागरूक होंगे / "राजनैतिक महात्‍वाकांक्षा पाले इन लोगों से भ्रष्‍टाचार के विरूद्ध कोई बडी सफलता मिलेगी इसकी उम्‍मीद करना बेकार है।" ये कहना गलत हें तो क्या जनता यूँ ही हाथ पर हाथ धरे बेठी रही / आपकी बातों से किसी भी दशा में सहमत नहीं हुआ जा सकता भीड़ कभी कभी वोट में नहीं बदलती / यदि आप की चुनावी सीट हरैया में कोई हीरोइन चुनाव लड़ / भीड़ जरुर आयेगी पर वोट अपनी मर्जी से देगी आपके काम को देख कर हवा का रुख भांप कर /

के द्वारा: satish3840 satish3840

अनुराधा जी ,..सादर नमस्कार मेरी समझ नहीं आता है कि आप जैसे विचारशील लोग बहुत जल्दी पोस्टमार्टम करने पर आमादा क्यों हो जाते हैं ,..जो मीडिया ने दिखाया बस वही समझा ,..दोनों महापुरुषों का एक साथ आना बहुत अच्छी बात है ,.इससे आन्दोलन को निश्चित ही बहुत बल मिला है ,..मीडिया को तो इसी लिए पैसे मिलते हैं कि वो किसी तरह से आन्दोलन को कमजोर करे और नेतृत्व की खराब छवि बनाये ,.खैर मैं जो कहना चाहता हूँ कि इस सभा से सरकार के होश उड़ गए हैं ,..जिसकी झुंझलाहट चमचा वर्किंग कमिटी में दिख रही है ,..सरेआम देश को लूटने वाले अगर आँख दिखने का दुसाहस करते हैं तो यह हमारा दुर्भाग्य ही है ,..देश बचाने के लिए इस सड़े हुए राजनीतिक तंत्र का बदलना जरूरी है जिसके लिए नए लोगों का राजनीति में आना जरूरी है ,... बात मुद्दों की होनी चाहिए ,..आपसे आशा है कि अगली पोस्ट में आप निश्चित ही मुद्दों पर कुछ प्रकाश डालेंगी ..एक बात बहुत महत्वपूर्ण है ,..स्वामी जी और आचार्य बालकृष्ण जी ने मंच से एलान किया है कि यदि सरकार चाहे तो हम पतंजलि योगपीठ उसको सौंप कर पूरी जिंदगी जेल में रह लेंगे ,..बस हमारे न्यायसंगत/तर्कसंगत मांगे मान लिया जाय ..यह उनका राष्ट्र के लिए समर्पण है ,..जिसको प्रत्येक हिन्दुस्तानी नमन करेगा ,..मुझे नहीं लगता कि किसी मीडिया ने इस बात को उठाया होगा ,..देश को नुक्सान हमारी अकर्मण्यता से हो रहा है ,..उनकी महत्वाकांक्षा सिर्फ इतनी है कि वो भारत को एक सबल राष्ट्र देखना चाहते हैं अन्यथा सबकुछ पाकर सबकुछ दांव पर लगाने का साहस किसी में नही होता है ..साभार

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

आदरणीय अनुराधा जी मुझे लगता है कि दोंनो के सामाजिक  एवं राजनैतिक  उद्देश्य तो अच्छे हैं किन्तु रास्ते गलत हैं। स्पष्ट  दिखता है कि दोंनो की राजनैतिक महात्वाकांक्षायें हैं। रामदेव जी तो अपनी महात्वाकांक्षा को कई बार व्यक्त भी कर  चुके हैं। रामदेव जी अन्य दलों के नेताओं का सहारा लेकर अपनी महत्वाकांक्षा प्राप्त करना चाहते हैं। रामदेव जी अच्छे योगाचार्य , सफल  व्यापारी, कुशल  वक्ता एवं परिपक्य विज्ञापन गुरु हो सकते हैं। लेकिन सफल  राजनेता होना इसमें संदेह है। जय गुरुदेव टाट महाराज  जी इसके उदाहरण  हैं। रामदेव जी इस  बात को जानते भी हैं, इसीलिये उन्होंने रामजेठमलानी जी एवं सुब्रामणियम स्वामी जी जैसे लोंगो को अपने संगठन  में शामिल  किया है। संभवतः उनका राजनैतिक  एजेऩ्डा ऐसे ही लोग  बना रहें हैं। संभवतः यह लोग सत्ता पर काविज  भी हो जायगे, किन्तु जनता पार्टी की तरह इनका हस्र होगा। अन्ना टीम  की राजनैतिक  महत्वाकांक्षा तो है, किन्तु वह अस्पष्ट है। वह व्यवस्था परिवर्तन के  साथ  अपनी महत्वाकांक्षा पूर्ण  करना चाहते हैं। यह  बिना क्राँति के संभव नहीं है। वह क्राँति का इंतजार भी कर रहे हैं। किन्तु अभी स्थिति इतनी भयावह नहीं हुई है कि क्राँति संभव हो। हाँ अगर अन्ना टीम सत्ता पर काविज  होगी तो यह देश को सौभाग्य होगा। संभवतः यह स्थापित्य भी दे पायेगे और मुझे लगता है कि प्रत्यक्ष  प्रजातंत्र भी स्थापित  हो जायेगा। यह जनता में नेताओं और राजनैतिक  दलों प्रति अविश्वसनीयता स्थापित  करना चाहते हैं। किन्तु धर्म  और जातिगत व्यवस्था होने के कारण  ऐसा संभव प्रतीत नहीं होता।  काँग्रेस  जनता में अपना विश्वास  खो चुकी है। भाजपा अपने कुकृत्यों के कारण  जनता में अपना विश्वास कायम नहीं कर सकी। इस  समय तो भारतीय राजनीति में शून्य की स्थिति है। जहाँ तक  रामदेव जी एवं अन्ना टीम की बात है यह  केवल  ब्राह्य रूप से ही एक  हो सकते हैं किन्तु आंतरिक  रूप से इनका एक  होना संभव नहीं है। रामदेव जी की भाजपा से निकटता, आरएसएस  से संबंध , एवं लालू और मुलायम के प्रति नरम  रवैया इन संबंधों के स्थायित्व में आड़े आयेंगे। अधिकांशतः आपके विचारों से मेरी सहमति है। प्रस्तुति के लिये बधाई....

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

दिनांक 6 अप्रैल को बाबा रामदेव ने गांधी परिवार द्वारा गांधी उपनाम लगाने को लेकर जो बात कही उससे यह स्पष्ट हो गया कि बाबा रामदेव के बूते का नही किसी बडे अभियान को चला सकें। एक यात्री किसी जंगल से गुजर रहा था, उसने देखा कि जंगल मे पेडों से चिपकी हुई लताओं के कारण रास्ता साफ सुथरा नही है। उसके पास दो रास्ते थे या तो वह रास्ता साफ करे या जिस भी तरह का रास्ता है उसकी न्यूनतम सफाई करके आगे बढ जाय। यदि यात्री रास्ता् साफ करने मे लग जायेगा तो शायद रास्ता साफ करने मे ही उसका सारा समय लग जायेगा। बाबा रामदेव ने विदेशी बैकों मे जमा धनराशि को देश मे लाने के लिये जो अभियान शुरू किया था वह एक बहुत बडा अभियान था, इसलिये आवश्यिक था कि अनावश्यक मुददों पर बेकार का समय वर्वाद न किया जाता लेकिन बाबा राम देव द्वारा अनावश्यक मुददे उठाकर एक महत्वपूर्ण अभियान को शैशवावस्था मे ही खत्म कर दिया जा रहा है।

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नमस्कार मैडम जी /"विधान सभा मे चुनाव मे मेरे हार के कारण"अ अप्रेल की पोस्ट का कोमेंट यहाँ इस लिए देना पड़ रहा हे कि वहां कोमेंट की अवधी समाप्त हो गयी हें / मैडम यदि में गलत ना हूँ तो आप बघरा सीट की पूर्व MLA ( २००२ ) व् कैराना की संसद सीट की पर्व एमपी ( २००४ ) तो नहीं / यदि हाँ तो आपका ब्लॉग व् उदगार पर बहुत अच्छा लगा / और खुसी हुई कि आज जनप्रतिनिधि ब्लॉग के माध्यम से जनता से जुड़ रहें हें / आपसे अनुरोध हें कि आप हार से निराश ने हो उत्तर प्रदेश में आपकी सरकार व् मुख्या मंत्री भी युवा हें / आप जनता की बीच रहिये / जनता आपके काम को अवश्य ही देखेगी व् पुनह सर आँखों पर बिथायेगी/ मुजफ्फरनगर व् शामली , कैराना उन ब्लोक में इतनी समस्याएं हें कि यदि आप अभी से उठाना शुरू कर दें तो जनता के बीच आप पैठ बना लेगें / मेरठ से पानीपत के रल लाइन , मुज़फ्फरनगर से शामली रेल लाइन , मुज़फ्फरनगर से रूडकी रेल लाइन / बिजली , सड़क रोजगार और न जाने कितनी समस्याएं हें जिनको उठा कर आप जनता के बीच फिर से अपनी उसी जगह पर आ जायेंगी / लेकिन आपसे उम्मीद हें कि आप जनता से सीधा संवाद बिलकुल भी छोड़ेगें / क्या टीम अन्ना नूरानी तेल हो गई है वाले ब्लॉग में ऊपर कि टिप्पणी के लिए क्षमा प्राथी /

के द्वारा: satish3840 satish3840

अनुराधा चोधरी जी में आपकी बात से सो प्रतिशत सहमत हूँ /आज अन्ना टीम के सदस्यों के बडबोले पन ने अपना सारा असर खो दिया हें उनकी स्थिति सलमान खुर्सीद जैसी है जो सारे मुसलामानों का समर्थन टी वी पर कहते दीखते थे / पर चुनाव में स्वयं उनकी पत्नी ही हार गयी / टी वी पर बोलने से इन लोगों को कुछ बहम हो गया है की सारा देश इन पर लट्टू हें पर जनता इनकी बडबोले पन को देख रही हें / यदि ये आज चुनाव में खड़े हो जाए तो शायद किसी एम् पी , एम् एल ए तो क्या शहर में एक निगम पार्षद का चुनाव भी जीत जाएँ इसमें मुझे शक हें / मनीष सिसोदिया , केजरीवाल , कुमार विशवास सब मर्यादा भूल गए हें / टी वी पर जिस प्रकार बोलते हें तो समझ में आ जाता हें थोथा चना बाजे घना / आपने कभी टी वी पर फिजा को देखा होगा / अब कहाँ हें वो / ठीक इनका भी ये ही हाल हें / जनता रामलीला मैदान में भ्रटाचार के मुद्दे पर आई थी न कि लोकपाल के मुद्दे पर / राम लीला में जिस प्रकार से खाने पीने की व्यवस्था थी तो तमाशबीन लोग भी इकट्ठा थे / समाचार की ख़बरों के अनुसार ५० लाख से जयादा खाने पर खर्च हुए / साहसिक लेख

के द्वारा: satish3840 satish3840

के द्वारा: Anuradha Chaudhary Anuradha Chaudhary

मेघालय में ईसाईयों द्वारा मारे व उजाड़े हिन्दुओं को सरकार राहत दें नई दिल्ली, 08 फरवरी 2011. धर्मरक्षक श्री दारा सेना और हिन्दू महासभा की संयुक्त प्रेस कांफ्रेस आज बंसत पंचमी को हिन्दू महासभा भवन में आयोजित की गयी। पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चन्द्र प्रकाश कौशिक और धर्मरक्षक श्री दारा सेना के अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने कहा कि हमारे लिये यह खुशी की बात है कि बसंत पंचमी के दिन जहाॅ वीर हकीकत राय ने हिन्दू धर्म की रक्षार्थ अपना बलिदान दिया था,वहीं बसन्त पंचमी के ही दिन उड़ीसा कि हिन्दू वीरों ने धर्म रक्षक श्री दारा सिंह के नेतृत्व में ग्राहम स्टेंस जैसे खूॅखार इसाई आतंकवादी का वध किया था।जिसके कारण पूरा देश चर्च के इसाई आतंकवाद के विरूद्ध खड़ा हुआ। पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए दारा सेना के अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने चिन्ता जतायी है कि मेघालय से 30 हजार हिन्दुओं को वहां के इसाईयों ने मार भगाया, हजारों हिन्दुओं के घरों में आग लगायी गयी। महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया। 30 हिन्दुओं का कत्ल चर्च के आतंकियों द्वारा किया गया। इस घटना का शर्मनाक पहलु यह है कि दिल्ली में इसाई लड़की के साथ बलात्कार मामले में प्रतिपक्ष की नेता सुषमा स्वराज दो दो धरने देती है। गृहमंत्री का भी बयान आता है किन्तु मेघालय में इसाईयों द्वारा हिन्दुओं के घर उजाडने पर उन्हें कत्ल करने पर सरकार प्रतिपक्ष, मीडिया, मानवाधिकार संगठन यहां तक की सुप्रिम कोर्ट भी खामोश है। पत्रकारों के समक्ष हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चन्द्र प्रकाश कौशिक ने मांग की कि मेघालय में तोड़े गये हिन्दू मन्दिरों का पुनः निर्माण कराया जाये। मारे गये राभा जनजाति के हिन्दुओं को दस-दस लाख रूपये दिये जाये। हिन्दुओं के जलाये गये घरों का पुनः निर्माण कराया जाये। इस अवसर पर हिन्दू महासभा के राष्टीय प्रवक्ता श्री प्रवीण शर्मा ने बापटिस्ट चर्च को आतंकवादी गिरोह घोषित करने की माॅग की।श्री शर्मा ने वेटिकन सरकार से अनुरोध कि वो वेटिकन में भव्य मन्दिर बनाने की दारा सेना की 5 वर्ष से की जा रही माॅग को स्वीकार करें। हिन्दू महासभा व दारा सेना ने विदेश मंत्री जी से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा। हिन्दू महासभा व दारा सेना शीघ्र ही एक रथ यात्रा निकालेगी इसमें चर्च के इसाई आतंकवाद का खुलासा किया जायेगा। जन-जन तक चर्च के ईसाई आतंकवाद पर सरकार की चुप्पी को बताया जायेगा।

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अनुराधा जी भारत में न्यायपालिका ही है जो देश में संविधान, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और जनता के शाशन के होने की याद दिलाती रहती है ......... आपका आंकलन एकदम सही है .. मुस्लिमो ने कभी ये बात नहीं कही की वहा राम का जन्म नहीं हुआ था उनका जो भय था वह आपने सही कहा ............ इसके संभावित परिणामो पर भी आपने सही प्रकाश डाला है .... मुझे लगता है अब आगे इस लडाई को नहीं ले जाना चाहिए.. लेकिन यह निश्चित है की सुप्रीम कोर्ट में दोनों पक्ष जायेंगे .इसकी मंशा दोनों पक्ष रख चुके है ........ क्योकि हमारे नेता लोग इतनी आसानी से और इतनी जल्दी अपनी रोजी रोटी खोना नहीं चाहेंगे.. .......... देश में अमन चैन रहे ये सभी चाहते है... आपका एक और बेहतरीन लेख पढने को मिला .. धन्यवाद

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

के द्वारा: Anuradha Chaudhary Anuradha Chaudhary

के द्वारा: Anuradha Chaudhary Anuradha Chaudhary

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प्रणाम तिवारी जी। इस कार्य मे हमे और आप सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। कुछ लोगों का मानना है कि आज हमारी जनसंख्यास इस लिये बढ रही है क्योंहकि राजनैतिक लोग प्रयास नही कर रहे है। वास्तनव मे यह राजनैतिक लोगों की समस्याे नही है यह हमारी और आपकी समस्याि है। परिवार बढने से समस्या हमारी बढती है राजनैतिक नेताओं की नही इसलिये इस पर हमे पहल करना होगा। यह कार्य जितना कठिन समझा जा रहा है उतना कठिन नही है। जरूरत केवल सभी पढे लिखे लोगों के ईमानदारी से प्रयास की है। यदि एक आदमी एक आदमी को समझा ले जाय तो इस कार्य को आसानी से किया जा सकता है। अनुरोध है कि आप केवल व्यक्ति को समझाने का प्रयास करे। अगर हम सभी केवल अपने नजदीकी एक-एक रिस्तेदार को समझा ले जाये तो हमारा इस महा अभियान मे यही सबसे बडा योगदान होगा। मै इस अभियान मे दो का योगदान कर चुकी हूं।

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आज भारतवर्ष दो वर्ग मे बटा है एक वर्ग वह जो शैक्षिक आर्थिक और सामाजिक रूप से विकसित है और दूसरा वह जो शैक्षिक आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछडा है। बच्‍चा पैदा करने के बारे मे दोनों का अलग अलग दृष्टिकोण है। शैक्षिक आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछडे लोगों मे कोई मानता है कि बच्चे भगवान की देन हैय तो कोई मानता है कि जितने बच्‍चे होगें उतनी कमाई होगीय कोई बच्‍चा इसलिये पैदा करता है कि व‍ह अपने बाप का अकेला था और उसके पटटीदारों ने उसका बहुत उत्‍पीडन किया था तो अधिक बच्‍चे पैदा करके वह उनसे बदला लेगाय कोई एक लडके की चाहत मे पांच लडकियां पैदा कर देता है तो कोई एक लडकी की चाहत मे पांच लडके पैदा कर देते हैंय कोई इसलिये कई बच्‍चे पैदा कर देता है कि यदि किसी कारण से बच्‍चे मरते है तो दस वारह मे कम से कम एक दो तो जिन्‍दा रहेगा जो उसकी वशं परम्‍परा को आगे बढायेगा। देश की बढ़ती हुयी जनसंख्या का सिर्फ एक ही कारण है राजनैतिक भ्रष्टाचार । देश की नीतियां विधायिका बनाती है । सन 1947 में ही 33 करोड़ की संख्या किसी भी राष्ट्र के लिये बहुत बड़ी थी । उसी वक्त इस पर नेताओं को विचार करना चाहिये थे । आज तो पानी सिर से सौ फिट ऊपर से बह रहा है उसके बावजूद जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिये कोई पहल नहीं की जारही है । यहां पर तो आदमी मात्र एक वोट से ज्यादा कुछ नहीं है । स्थिति गंभीर होती चली जा रही है । आईना दिखाने के लिये अनुराधा जी बहुत बहुत धन्यवाद ।

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बहुत समीचीन पोस्ट मैडम, बधाई । जनसंख्या विस्फ़ोट समस्याएं पैदा करता है, लेकिन विकास से उसे दोयम दर्ज़े पर भी ठेला जा सकता है, आज चीन ने ये साबित करके दिखा दिया है । आपका कहना ठीक है कि सबसे आवश्यक मानसिकता में परिवर्तन है । भ्रष्टाचारी मानसिकता, मुफ़्तखोरी की मानसिकता, दोहरे चरित्र की मानसिकता आदि ऐसे शैवाल हैं, जो मात्र पिछड़ी धारा में ही नहीं जकड़े हुए हैं । उससे अधिक इसकी जकड़न की गिरफ़्त में हमारा तथाकथित सुविधासम्पन्न समाज है, जिसकी जवाबदेही के तहत पिछड़ों को भी अपनी जगह से उठा कर मानसिक और आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है । लेकिन यह वर्ग इतना स्वकेंद्रित हो चुका है, कि अपनी सत्ता और वर्चस्व बनाए रखने के लिये चाहता है कि यह ज़मात इसी प्रकार दरिद्र, अशिक्षित, अधिक से अधिक बच्चे पैदा करने की प्रवृत्ति वाली बनी रहे, ताकि इनका वोटबैंक भी बढ़े, और साथ ही इनके कुकृत्यों की ओर उसका ध्यान आकर्षित होकर कभी उनके हितों के विरुद्ध न तो सोचने लायक हो सके, न ही कुछ करने लायक । पेट में अन्न होगा, शरीर में जान आ जाएगी, छत की चिन्ता नहीं रहेगी, तो फ़िर इनकी बखिया उधेड़ने पर भी तो ध्यान जा सकता है? इस समस्या पर विस्तृत विवेचनात्मक लेख के लिये साधुवाद ।

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पन्त जी आपकी बात सही है लेकिन आज सचिवालय के आई ए एस आफिसर बडे बाबू से ज्यादा कुछ नही है। इस देश को गर्त मे ले जाने का कार्य इन आई ए एस अधिकारियों ने ही किया किया है। भ्रष्टाचार के जनक यही आई ए एस है। जब जन प्रतिनिधि पूर्ण रूपेण ईमानदार थे उस समय उन्हे बेईमानी इन्ही अधिकारियों ने ही सिखाया। आज प्रशासनिक सेवा देश के लिये कल्याण का साधन नही बल्कि अभिषाप बन गई है। देश के प्रगति मे यदि कोई बाधक है तो वह ब्यूरोक्रेशी ही है। रही बात भ्रष्टाचार की तो जनप्रतिनिधि भी तो इसी समाज के अंग है केवल उन्ही की बेईमानी पर ही क्यो हो हल्ला मचाया जाता है। समाज टुकडो मे विकसित नही होता है। उसका समग्र विकास होता है। समाज के एक अंग का प्रभाव दूसरे पर पडता है। प्रतिक्रिया के लिये धन्यवाद।

के द्वारा:

अनुराधा जी, जहाँ तक वेतन की बात है........... वास्तव में ये सांसदों के वेतन की नहीं उनके अहम की लड़ाई बन चुकी है............ एक IAS से तुलना करके वेतन मांगना.............. क्या तर्क सम्मत है.......... यदि ध्यान दिया जाये तो सरकार संसद से नहीं सचिवालयों से चल रही है................... मंत्री जी को अपने विभाग के सम्बन्ध में ABC नहीं आती पर फिर भी वो 5 साल काम करते है... और अपनी उपलब्धियां गिनाते है......... कैसे उस IAS के कारण जो उनके साथ है......... उस IAS या किसी भी सरकारी कर्मचारी जिसकी तुलना आप इस संसद वर्ग से कर रही hain...... उसको एक छोटी सी गलती पर सस्पेंड होना पड़ जाता है.. कई बार नौकरी से हाथ धोना पड़ता है...... पर यहाँ घोटाले पे घोटाले कर के मंत्री जी फिर संसद आ जाते हैं........... शिबू सोरेन पर क्या प्रतिक्रिया हो सकती है.........

के द्वारा: Piyush Pant Piyush Pant

शाही जी इस भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिये जो प्रयास किये जा रहे है वे सारे प्रयास अधूरे हैं। भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिये तंत्र को बदलने की आवश्यकता है। आपने देखा होगा कि कुछ वर्षो पहले रेलवे मे टिकट के लिये लम्बी लाइन लगानी पडती थी। रिजर्वेशन मे भ्रष्टाचार टिकटों के ब्लैक मेल के रूप मे धुन की तरह व्याप्त् था। लेकिन थोडा सा ढाचागत सुधार इस भ्रष्टाचार को सिरे से समाप्त कर दिया। आज आप शहर के किसी वेन्डर से एक रूपया अधिक देकर तुरन्त रिर्जवेश प्राप्त कर सकते है। नेट के माध्यम से रिर्जवेश कराया जा सकता है। इस ढाचागत सुधार ने रेलवे मे कम से कम एक मामले मे भ्रष्टाचार को घटाया। इसी प्रकार राज्य सरकार मे व्याप्त भ्रष्टाचार को कम करने के लिये ढाचागत सुधार की आवश्‍यकता है। राज्य सरकार मे निर्णय लेने की वर्षों पुरानी परम्परा प्रचलित है इसे बदलना होगा। कर्मियों को वेतन एवं भत्ते उनके कार्यों के अनुरूप दिये जाने चाहियें जो कर्मी अनुपयोगी हैं उन्हे तत्काल सेवामुक्त किया जाना चाहिये। कई अन्य उपाय है जिन्हे अपना कर भ्रष्टांचार पर अंकुश लगाया जा सकता है।

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अहद जी आपकी सोच से मै सहमत हूं। हर वर्ग अपने को गरीब दिखाने मे लगा है। इससे उसे क्‍या मिल जायेगा पता नही। आजतक का इतिहास है गरीबी कभी सरकारी सहायता से नही दूर हुई है। गरीबी हमेशा अपने प्रयास से दूर हुई है। उत्‍तर भारत मे हिन्‍दुओं मे एक जाति है कुर्मी जों कभी सरकारी सहायता की मोहताज नही रही आज विना किसी राजनैतिक और सरकारी आर्थिक सहायता के अपनी प्रगति कर रही है। उसने कभी अपने को गरीब नही कहा। वास्‍तव मे विकास के लिये आत्‍मविश्‍वास की जरूरत होती है। भीख मांगने से आत्‍मविश्‍वास खत्‍म हो जाता है जो विकास मे बाधक होता है। दलितो का यही हस्र हुआ। हमेसा याद दिलाया गया कि तुम बहुत गरीब हो तुम विना आरक्षण और सरकारी सहायता के आगे नही बढ सकते। परि णाम स्‍वरूप वह साठ साल तक आरक्षण पाने के बाद भी एक मजबूत कौम के रूप मे विकसित नही हो पायी। कही मुसलमान भी इसी धारणा का शिकार तो नही हो र‍हा है। अहद जी ग्रामीण क्षेत्र मे मुसलमान दलितों से बेहतर स्थिति मे है यह मेरा ही नही आम धारणा है रही बात सच्‍चर कमटी की तो उसका मंतव्‍य किन आकडों पर आधारित है मुझे मालूम नही है।

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के द्वारा: Anuradha Chaudhary Anuradha Chaudhary

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तुफैल भाई मै कब से आपके टिप्पीणी का इन्त जार कर रही थी। मेरे विचार मे इस विन्दूआ पर लोग विचार रख रहे हैं यही मेरी उपलब्धि है मेरा आशय किसी की भावना को आहत करना नही है मै केवल एक तर्क आधारित समाज के विकास मे लगी हूं। मेरा मानना है कि जो कुछ स्वीनकारें उसे यदि आप तर्कसंगत न पायें तो कृपया स्वी कार न करे। भगवान शंकर कों तर्को के आधार पर सिद्ध किया जा सकता है इसलिये मै मानती हूं कि भगवान शंकर के अस्तित्वन को स्वीोकार किया जा सकता है। यदयपि आस्था मे तर्क का स्था न नही होता है लेकिन जो चीज तर्कसंगत नही है उसे स्वी कारना अंधा अनुकरण कहलायेगा जो मेरी समझ से उचित नही है। आपकी टिप्पीणी के लिये बहुत बहुत धन्यकवाद।

के द्वारा: Anuradha Chaudhary Anuradha Chaudhary

अभिवादन, सृष्टी रचियता ने प्राणियों की जरुरत की सारी चीजों का निर्माण सृष्टी निर्माण के समय ही प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से कर दिया था. अपनी बुद्धि को विकसित करते रहो और अपनी जरुरत की चीजो को लेते रहो. लेख के शीर्षक 'भगवान शंकर जी विज्ञान की नजर में' के अनुसार ऐसा लगता है जैसे विज्ञानं पहले और भगवान बाद में. आपने लिखा है- "वास्‍तव भगवान शंकर एक महान वैज्ञानिक थे; उन्‍होने अपने समय अनेक वैज्ञानिक आविष्‍कार किया। उनके द्वारा किये गये शोध ऐसे थे जो सामान्‍य व्‍यक्ति के समझ के परे था। लोगो ने इसे चमत्‍कार माना और कहने लगे कि यह कार्य केवल भगवान ही कर सकता है; इसलिये शंकर जी को भगवान मानने लगे।" ये क्या कह रही है आप ? भाव और शब्द विपरीत दिशा में जा रहे है. इससे इंकार नहीं की आपकी मंशा गलत नहीं है लेकिन भाव विन्यास ऐसा हो गया जैसे- "एक बार एक व्यक्ति भूलने के डर से 'खिचड़ी' शब्द को बोलता हुआ घोड़े पर जा रहा था और रास्ते में आने वाले गड्ढो आदि के कारण वह कब 'खाचिडी' बोलने लगा पता ही नहीं चला, खेत में किसान अपनी फसल की रक्षा पंछियों से कर रहा था, जब इस व्यक्ति को 'खाचिडी' कहते सुना तो ठीक-ठाक धुनाई कर डाली और फिर आगे उस खाचिडी का न जाने क्या-२ बनता चला गया. पूरे रास्ते उसके साथ बहुत कुछ हुआ. धन्यवाद.

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के द्वारा: Anuradha Chaudhary Anuradha Chaudhary

प्रिय संजय जी मै समझती हू कि भगवान राम के समय मे भी विज्ञान काफी विकसित था। उनके द्वारा स्वयं इंजीनियरिंग की पढाई की गई थी या नही यह तो बहस का विषय हो सकता है लेकिन सुग्रीव की सेना मे नल और नील दो ऐसे व्यकक्तित्व थे जिनके पास इंजीनियर के ऐसे गुण थे कि यदि वे पत्थर को छू लेते तो वे पानी पर तैरने लगते। उनके पास क्या विधा थी यह एक शोध का विषय है। रही बात भगवान राम चन्द्र जी द्वारा पुल वनवाने का तो मै पूरी तरह से सहमत हू कि भगवान राम चन्द्र जी ने पुल वनवाया था क्योकि आज भी उस पुल के अवशेष समुद्र मे उपलब्ध है जिनका चित्र उपग्रह द्वारा प्राप्त किया गया है। रही बात विश्वा‍स की तो वे लोग जिन्होने वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर इसका विश्लेषण नही किया है वे लोग कभी कभी विश्वास करते है और कभी कभी इसे कपोल कल्पित मान लेते है। भगवान शंकर के कई मानने वालो का कई वार विश्वास डोल जाता है लेकिन मेरा पूरा विश्वास है कि भगवान शंकर थे। इसलिये मै कहती हू कि यह एक खोज का विषय है कि नल और नील ने किस तकनीकी का प्रयोग किया जिससे पत्थर पानी पर तैरने लगा।

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के द्वारा: Anuradha Chaudhary Anuradha Chaudhary

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जसवीर सिह जी मै मानती हू कि धर्म मे तर्क का स्था न नही होता लेकिन धर्म समकालीन विज्ञान की स्थिति से हमे अवगत कराता है। धर्म को तर्क की कसौटी पर कसने से एक तर्क आधारित समाज का विकास होता है। हमने मान लिया कि भगवान शंकर ने जो किया वह चमत्का र था और उसे वे ही कर सकते थे इसलिये हमने उसको तर्को पर कसने के बजाय चमत्कार मानकर उस पर विचार करना छोड दिया। परिणाम हुआ हम विज्ञान मे पिछड गये। हमारे पास शब्द भेदी वाण था; अग्निवाण था; पुष्पक विमान था लेकिन समय के साथ हम विज्ञान मे पिछड गये। पश्चिम वाले उन्हे् खोज निकाले। आश्था अलग चीज है सभी तथ्यों को तर्को की कसौटी पर कसे। शायद कुछ नया मिल जाय। यदि मेरी बात से आपकी भावना को ठेस पहुचा है तो मै उसके लिये खेद व्यतक्त करती हूं।

के द्वारा: Anuradha Chaudhary Anuradha Chaudhary

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अभिवादन, लगता है की आप सच में परधानी की तैयारी करने लगी है. लेख लिख कर मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत कर रही है. बाद में इसका लाभ लेंगी. जैसा की कांग्रेस के बारे में अक्सर सुनने को मिलता है. गैर मुस्लिमों के प्रति मुसलमानों का रवय्या आपको क्यों दिखाई नहीं दे रहा है ? आपको पता नहीं है की हमारे सब काम उलटे ही होते है, हम सड़क पर नमाज पढ़कर लोगों को कस्ट देते है. तलाक का इस्तेमाल और पोलिओ का बहिस्कार और न जाने क्या क्या. अल्प संख्यक के नाम पर सरकार से लाभ भी ले रहे है. मुस्लमान मर्द, औरतों के हक़ भी मार रहे है. शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी हमारे पास नहीं है. फिर भी आप तारीफ किये जा रही है. आपको पता नहीं की आतंकवाद का नाम आते ही मुसलमानों का चेहरा दिखाई देने लगता है. हमारे मुल्ला-काजी सिवाय फतवा जारी करने के और करते भी क्या है ? हम भारत को अपना देश मानने का दिखावा भी करते है. खैर ये लेख जो आपने लिखा है वह अच्छा है तो लोग उसे अच्छा ही कहेंगे. धन्यवाद.

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अनुराधा बहन जी , आप के एक अछे लेख के लिए बधाई ! ! ! पर किया आप को नहीं लगता अगर हम आम हिन्दुस्तानी मिल जाये तो हमारा भारत फिर से सोने की चिड़िया हो सकता है .. जरुरत है तो बस जागुरता की ! ! ! सबसे बड़े हमारे हिंदुस्तान मैं धिमक है हमारे मिनिस्टर्स जो अपने तुच्छ स्वार्थ के लिए देश को धिमक की तरह खा रहे है, अब शायद अति होने को है इसलिए भी शायद समय बदल रहा है और समाज मैं यह बदलाव दिख रहा है. जब तक हम आम इन्सान एक नहीं हो जाते तब तक यह मुट्ठी भर लोग अपना उलू सीधा करते रहेंगे ... जागो आम हिन्दुस्तानियों जागो ! ! ! अपनी ताकत को पहेचानो और मिटा दो समाज की गन्दगी को. करना किया है ? ? ? सबसे पहले अपनी ताकत को पहेचानना है..और किसी का भी नुकसान / बुरा करने से पहेले सिर्फ कुछ सेकंड्स सोचना है... पर इन समाज के रखवालो को,इन दीमको को जड़ से निकालकर उखाड़ना है. (साथ मैं मिलकर) जागो हिन्दुस्तानियों जागो ! ! !

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बहुत अच्छा लेख है. दरअसल रावण पर अधिकतर मत एकतरफा रखे गए है और अच्छइयो को नकारकर हम शायद अपना ही नुकसान कर रहे है. में आपके लेख पर कुछ और आयाम जोड़ना चाहूँगा - - रावण ने सीता को जेल में नहीं बल्की इक राजनैतिक नज़रबंदी में आशोक वाटिका में रखा था - रावण दुनिया का शायद पहला राजा था जिसके पास महिला पुलिस थी. - रास्ट्रीय सुरक्सा प्रशाशन , नगर प्रशाशन, इमारत निर्माण, पार्को और सड़को की व्यवस्था आदि प्रणालियाँ रावण ने उस काल में विकसित कर ली थी. -रावण एक योद्धा ही नहीं बल्कि एक, कुशल शाशक, महान शिव भक्त, समर्पित भाई और पुत्र, साहित्यकार, संगीतज्ञ, ज्योतिष, वैज्ञानिक, वास्तुकार और गुनी वेध भी था. मेरा तो मानना है की रावण जैसे व्यक्तित्व से काफी कुछ सीखा जा सकता है. आपका लेख सही दिशा में एक सराहनीय प्रयास है

के द्वारा: digvijaytrivedi digvijaytrivedi

के द्वारा: Anuradha Chaudhary Anuradha Chaudhary

अनुराधा जी अभिवादन, कहीं आप खुद तो परधान बनने की नहीं सोच रही है ? यदि नहीं, तो जल्द सोचिये. समाज की इस बुनियादी व्यवस्था में आप जैसे इंटेलिजेंट, जागरूक और नैतिकता की साख रखने वाले लोगों की ही वास्तव में जरुरत होती है. ग्राम पंचायतें सामाजिक न्‍याय का साधन भी है और विकास का माध्‍यम भी. जिस प्रकार सुपर कम्पुटर से भी रिजल्ट के लिए इन्सान की ही जरुरत होती है, जिस प्रकार हवा में उड़ते विमान को ऑटो पायलट पर लगाने के लिए भी इन्सान की ही जरुरत होती है, उसी प्रकार किसी भी संस्था से बेहतर रिजल्ट के लिए इन्सान की ही जरुरत होती है. कठपुतलियां जो खुद का भला नहीं कर सकती, वे दूसरे का भला किस प्रकार करेंगी ? हम स्वार्थ सिद्धि के चक्कर में पड़कर वोट डालते है, फिर रोते भी हम ही है. महिला होने या जाती का लाभ लेने के लिए ही कठपुतलियों को सामने खड़ा किया जाता है. परदे के पीछे तो सकुनी मामा ही होता है. कठपुतलियों की जगह बेहतर लोग होंगे तो संस्था भी बेहतर रिजल्ट दे पायेगी. धन्यवाद.

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अनुराधा जी अभिवादन, सेना के प्रति आपके जज्बे को सलाम. सेन्य बल का नुकसान हो या फिर नागरिक नुकसान, दोनों ही देश हित में नहीं होतें हैं. लोकतान्त्रिक प्रणाली में ऐसा होना ही क्यों चाहिए ? आतंकवाद और नक्सलवाद सरकारी तंत्र के प्रति कुछ लोगों का विरोध प्रदर्शन ही है. छुपे रास्तों से इनकी ताकत बढ़ गई है इसलिए ये आज बड़ी-२ चुनौतिया दे रहे है. आतंकवाद को यदि वैश्विक समस्या मान भी लिया जाये तो भी नक्सलवाद पर तो सरकार का नियंत्रण होना ही चाहिए. लेकिन चूँकि सरकारी कुर्सी के पाए गठबंधन की राजनीती का परिणाम बन चुके है, अतः ठोस निर्णय संभव नहीं. गठबंधन की राजनीती ठोस निर्णय लेने में अड़ंगा डालती है. इसे दुरुस्त करने की जरुरत है. IAS, IPS, IFS, देश का वास्तविक संचालन करते है, लेकिन इनके दिमाग से निकला कोई फार्मूला तब तक काम नहीं कर सकता जब तक मंत्री जी की मोहर न लग जाये और ऐसा तब होगा जब मंत्री जी को पूरा समर्थन मिल जायेगा. तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. हमारे देश का भी अजब हाल है. पुलिस निरीक्षक का प्रमोसन या तबादला कर कभी डाक्टर बनाते तो नहीं सुना लेकिन सत्ता परिवर्तन में वित्त मंत्री को गृह मंत्री, गृह मंत्री को वित्त मत्री आदि बनाते अवश्य देख लिया. पता नहीं ये लोग कितने तेज़ दिमाग होते है की हर प्रकार का काम कर लेते है !! चूँकि उम्मीद पर दुनिया कायम है अतः आप भी भावी उन्नति की उम्मीद रखिये. इस आशा के साथ की आप मेरा आशय समझ रही होंगी. धन्यवाद.

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डाक्टर व्यवसायी बनाने मैं वे कायदे कानून भी जिमेदार है जो उसे उपभोक्ता संरक्षण कानून मैं लाकर मरीज को उपभोक्ता मनाता है इससे गुणवत्ता तो नहीं सुधरती उल्टा डॉक्टर खुद महंगे इन्शुरन्स करते है व पैसा हर मरीज पर फीस बढाकर लिया जाता है गंभीर व क्लिष्ठ मरीज को डॉक्टर देखने से घबराते है हर मौत पर परिजन डॉक्टर को जिन्दा मार देने को तेयार हो जाते हैं आज के से सिस्टम मैं कनिष्ठ लिपिक डॉक्टर से बड़े बंगले मैं रहता है समाज मैं केवल पैसे का बोल बाला होने से १२ -१४ साल अनवरत मेहनत करने वाला डॉक्टर अपने को ठगा महसूस करता है यदि गंभीर प्रयास नहीं किये गए तो अब गाँव देहात मैं ही नहीं जिला व् तालुका मैं भी सही डॉक्टर नहीं मिलेंगे आपका लेख सरहनिये है वास्तिक के करीब है धन्यवाद

के द्वारा: RaJ RaJ

के द्वारा: Anuradha Chaudhary Anuradha Chaudhary

बिल्‍कुल सही सोच। आज जिन लोगों को हम ईडियट कह कर उनका माखौल उडाते हैं शायद हम उनके बुद्धिलब्धि के स्‍तर को जान नहीं पाते। ये बडी वजह है जो मजाक का स्‍वरूप लेती है। देश को आज ऐसे ही इडियटस की जरूरत है जो सालों आगे की सोच सकें। किसी इडियट ने ही यह सोचा होगा कि फोन बनाया जाए और उससे भी अधिक इडियट वह रहा जिसने मोबाइल बना डाला। शायद उससे भी अधिक इडियट वह था जिसने कम्‍प्‍यूटर, इंटरनेट, वीडियो कान्‍फेसिंग, लाइव टीवी, जैसी चीजें बनाने के बारे में सोचा और उसे साकार किया। आज उन इडियटों को हम जीनियस कहते हैं। काश कि देश में ऐसे इडियट और भी पैदा हों और संसार को बता दें कि वह कितने इडियट या पिफर जीनियस हैं।

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के द्वारा: आरएस चौधरी, उत्‍तर प्रदेश के विकास के लिए सतत प्रयत्‍नशील आरएस चौधरी, उत्‍तर प्रदेश के विकास के लिए सतत प्रयत्‍नशील

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के द्वारा: Suneel Pathak, jagran Suneel Pathak, jagran




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